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Chapter 5- चुम्बकत्व एवं द्रव्य (Magnetism and Matter) Interview Questions Answers

Question 1 :
भू-चुम्बकत्व सम्बन्धी निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
1. एक सदिश को पूर्ण रूप से व्यक्त करने के लिए तीन राशियों की आवश्यकता होती है। उन तीन स्वतन्त्र राशियों के नाम लिखिए जो परम्परागत रूप से पृथ्वी के चुम्बकीय-क्षेत्र को व्यक्त करने के लिए प्रयुक्त होती हैं।
2. दक्षिण भारत में किसी स्थान पर नति कोण का मान लगभग 18° है। ब्रिटेन में आप इससे अधिक नति कोण की अपेक्षा करेंगे या कम की?
3. यदि आप ऑस्ट्रेलिया के मेलबोर्न शहर में भू-चुम्बकीय क्षेत्र रेखाओं का नक्शा बनाएँ तो ये रेखाएँ पृथ्वी के अन्दर जाएँगी या इससे बाहर आएँगी?
4. एक चुम्बकीय सुई जो ऊर्ध्वाधर तल में घूमने के लिए स्वतन्त्र है, यदि भू-चुम्बकीय उत्तर या दक्षिण ध्रुव पर रखी हो तो यह किस दिशा में संकेत करेगी?
5. यह माना जाता है कि पृथ्वी का चुम्बकीय क्षेत्र लगभग एक चुम्बकीय द्विध्रुव के क्षेत्र जैसा है। जो पृथ्वी के केन्द्र पर रखा है और जिसका द्विध्रुव आघूर्ण 8 x 1022 JT-1 है। कोई ढंग सुझाइए जिससे इस संख्या के परिमाण की कोटि जाँची जा सके।
6. भूगर्भशास्त्रियों का मानना है कि मुख्य N-S चुम्बकीय ध्रुवों के अतिरिक्त, पृथ्वी की सतह पर कई अन्य स्थानीय ध्रुव भी हैं, जो विभिन्न दिशाओं में विन्यस्त हैं। ऐसा होना कैसे सम्भव है?

Answer 1 :

  1.  

a.            पृथ्वी के चुम्बकीय-क्षेत्र को व्यक्त करने के लिए प्रयुक्त होने वाली तीन राशियाँ निम्नलिखित

      • नति कोण अथवा नमन कोण δ (Angle of Dip or Angle of Magnetic Inclination)
      • दिकुपात का कोण θ (Angle of Declination)
      • पृथ्वी के चुम्बकीय-क्षेत्र का क्षैतिज अवयव BH (Horizontal Component of Earth’s Magnetic Field)

b.           जी हाँ, चूँकि ब्रिटेन, दक्षिण भारत की तुलना में पृथ्वी के उत्तरी ध्रुव के अधिक समीप है; अतः यहाँ नति कोण अधिक होगा। वास्तव में ब्रिटेन में नति कोण लगभग 70° है।

  1.  

a.            ऑस्ट्रेलिया, पृथ्वी के दक्षिण गोलार्द्ध में स्थित है। चूंकि पृथ्वी के दक्षिण ध्रुव से चुम्बकीय-क्षेत्र रेखाएँ बाहर निकलती हैं; अतः ये पृथ्वी से बाहर निकलती प्रतीत होंगी।

b.           चूँकि ध्रुवों पर पृथ्वी का चुम्बकीय-क्षेत्र ऊर्ध्वाधर होता है; अतः ध्रुवों पर लटकी चुम्बकीय सुई (जो ऊर्ध्वाधर तल में घूमने के लिए स्वतन्त्र है) ऊर्ध्वाधर दिशा की ओर इंगित करेगी।

यदि हम मान लें कि पृथ्वी के केन्द्र पर M चुम्बकीय-आघूर्ण का चुम्बकीय द्विध्रुव रखा है तो पृथ्वी के चुम्बकीय निरक्ष पर स्थित बिन्दुओं की इस द्विध्रुव के केन्द्र से दूरी पृथ्वी की त्रिज्या के बराबर होगी।

a.            स्पष्ट है कि पृथ्वी के चुम्बकीय द्विध्रुव आघूर्ण का यह मान 8 x 1022 JT-1 के अत्यन्त निकट है। इस प्रकार पृथ्वी के चुम्बकीय द्विध्रुव आघूर्ण के परिमाण की कोटि की जाँच की जा सकती है।

  1. यद्यपि पृथ्वी का सम्पूर्ण चुम्बकीय-क्षेत्र, एकल चुम्बकीय द्विध्रुव के कारण माना जाता है अपितु स्थानीय स्तर पर चुम्बकित पदार्थों के भण्डार अन्य चुम्बकीय ध्रुवों का निर्माण करते हैं।

Question 2 :
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
1. एक जगह से दूसरी जगह जाने पर पृथ्वी का चुम्बकीय-क्षेत्र बदलता है। क्या यह समय के साथ भी बदलता है? यदि हाँ, तो कितने समय अन्तराल पर इसमें पर्याप्त परिवर्तन होते हैं?
2. पृथ्वी के क्रोड में लोहा है, यह ज्ञात है। फिर भी भूगर्भशास्त्री इसको पृथ्वी के चुम्बकीय-क्षेत्र का स्रोत नहीं मानते। क्यों?
3. पृथ्वी के क्रोड के बाहरी चालक भाग में प्रवाहित होने वाली आवेश धाराएँ भू-चुम्बकीय क्षेत्र के लिए उत्तरदायी समझी जाती हैं। इन धाराओं को बनाए रखने वाली बैटरी (ऊर्जा स्रोत) क्या हो सकती है?
4. अपने 4-5 अरब वर्षों के इतिहास में पृथ्वी अपने चुम्बकीय-क्षेत्र की दिशा कई बार उलट चुकी होगी। भूगर्भशास्त्री, इतने सुदूर अतीत के पृथ्वी के चुम्बकीय-क्षेत्र के बारे में कैसे जान पाते हैं?
5. बहुत अधिक दूरियों पर (30,000 km से अधिक) पृथ्वी का चुम्बकीय-क्षेत्र अपनी द्विध्रुवीय आकृति से काफी भिन्न हो जाता है। कौन-से कारक इस विकृति के लिए उत्तरदायी हो सकते हैं?
6. अन्तरातारकीय अन्तरिक्ष में 10-12 T की कोटि का बहुत ही क्षीण चुम्बकीय-क्षेत्र होता है। क्या इस क्षीण चुम्बकीय-क्षेत्र के भी कुछ प्रभावी परिणाम हो सकते हैं। समझाइए। [टिप्पणी : प्रश्न 5.2 का उद्देश्य मुख्यतः आपकी जिज्ञासा जगाना है। उपरोक्त कई प्रश्नों के उत्तर या तो काम चलाऊ हैं या अज्ञात हैं। जितना सम्भव हो सका, प्रश्नों के संक्षिप्त उत्तर पुस्तक के अन्त में दिए गए हैं। विस्तृत उत्तरों के लिए आपको भू-चुम्बकत्व पर कोई अच्छी पाठ्यपुस्तक देखनी होगी।]

Answer 2 :

  1.  
    1. यद्यपि यह सत्य है कि पृथ्वी का चुम्बकीय क्षेत्र समय के साथ बदलता है, परन्तु चुम्बकीय-क्षेत्र में प्रेक्षण योग्य परिवर्तन के लिए कोई निश्चित समय सीमा निर्धारित नहीं की जा सकती। इसमें सैकड़ों वर्ष का समय भी लग सकता है।
    2. यह सुज्ञात तथ्य है कि पृथ्वी के क्रोड में पिघला हुआ लोहा है परन्तु इसका ताप लोहे के क्यूरी ताप से कहीं अधिक है। इतने उच्च ताप पर यह (लौह चुम्बकीय नहीं हो सकता) कोई चुम्बकीय-क्षेत्र उत्पन्न नहीं कर सकता।
  1. यह माना जाता है कि पृथ्वी के गर्भ में उपस्थित रेडियोएक्टिव पदार्थों के विघटन से प्राप्त ऊर्जा ही आवेश धाराओं की ऊर्जा का स्रोत है।
  2. प्रारम्भ में पृथ्वी के गर्भ में अनेक पिघली हुई चट्टानें थीं जो समय के साथ धीरे-धीरे ठोस होती चली गईं। इन चट्टानों में मौजूद लौह-चुम्बकीय पदार्थ उस समय के पृथ्वी के चुम्बकीय-क्षेत्र के अनुरूप संरेखित हो गए। इस प्रकार भूतकाल का पृथ्वी का चुम्बकीय-क्षेत्र इन चट्टानों में चुम्बकत्व एवं द्रव्य 185 चुम्बकीय पदार्थों के अनुरूपण में अभिलेखित है। इन चट्टानों का भूचुम्बकीय अध्ययन उस समय के पृथ्वी के चुम्बकीय-क्षेत्र का ज्ञान प्रदान करता है।
  3. पृथ्वी के आयनमण्डल में अनेक आवेशित कण विद्यमान रहते हैं जिनकी गति एक अलग चुम्बकीय-क्षेत्र उत्पन्न करती है। यही चुम्बकीय-क्षेत्र, पृथ्वी तल से अधिक दूरी पर पृथ्वी के चुम्बकीय-क्षेत्र को विकृत कर देता है। आयनों के कारण उत्पन्न चुम्बकीय-क्षेत्र सौर पवन पर निर्भर करता है।
4. इससे स्पष्ट है कि अत्यन्त क्षीण चुम्बकीय-क्षेत्र में गतिमान आवेशित कण अति विशाल त्रिज्या का मार्ग अपनाती है जो कि थोड़ी दूरी में लगभग सरल रेखीय प्रतीत होता है; अतः छोटी दूरियों के लिए सूक्ष्म चुम्बकीय-क्षेत्र अप्रभावी प्रतीत होते हैं परन्तु बड़ी दूरियों में ये प्रभावी विक्षेपण उत्पन्न करते हैं।

Question 3 : एक छोटा छड़ चुम्बक जो एकसमान बाह्य चुम्बकीय-क्षेत्र 0.25 T के साथ 30° का कोण बनाता है, पर 4.5 x 10-2 Jका बल आघूर्ण लगता है। चुम्बक के चुम्बकीय-आघूर्ण का परिमाण क्या है?

Answer 3 :


Question 4 :
चुम्बकीय-आघूर्ण M = 0.32 JT-1 वाला एक छोटा छड़ चुम्बक, 0.15 T के एकसमान बाह्य चुम्बकीय-क्षेत्र में रखा है। यदि यह छड़ क्षेत्र के तल में घूमने के लिए स्वतन्त्र हो तो क्षेत्र के किस विन्यास में यह
(i) स्थायी सन्तुलन और
(ii) अस्थायी सन्तुलन में होगा? प्रत्येक स्थिति में चुम्बक की स्थितिज ऊर्जा का मान बताइए।

Answer 4 :

दिया है, चुम्बक का चुम्बकीय आघूर्ण M = 0.32 जूल/टेस्ला
चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता B = 0.15 टेस्ला
(i) चुम्बकीय क्षेत्र में छड़ चुम्बक के स्थायी सन्तुलन के लिए तथा एक ही दिशा में होने चाहिए,
अर्थात् θ = 0 इस स्थिति में चुम्बक की स्थितिज ऊर्जा
U = 
.

= – MB cos θ
= – 0.32 x 0.15 x cos 0
= – 0.32 x 0.15 x 1
= – 0.048
जूल

(ii) चुम्बकीय क्षेत्र में छड़ चुम्बक के अस्थायी सन्तुलन के लिए तथा परस्पर विपरीत दिशा में होने चाहिए, अर्थात् θ = 180°
U = 
.

= – MB cos θ
= – MB cos 180
= – 0.32 x 0.15 x (-1)
= +0.048
जूल


Question 5 : एक परिनालिका में पास-पास लपेटे गए 800 फेरे हैं तथा इसकी अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल 25 x 10-4 m2 है और इसमें 3.0 A धारा प्रवाहित हो रही है। समझाइए कि किस अर्थ में यह परिनालिका एक छड़ चुम्बक की तरह व्यवहार करती है। इसके साथ जुड़ा हुआ चुम्बकीय-आघूर्ण कितना है?

Answer 5 :

चुम्बकीय आघूर्ण M = NiA
M = 800 x 3.0
ऐम्पियर x 2.5 x 10-4 मी2
= 0.600
ऐम्पियर-मीटर
चूँकि परिनालिका को किसी चुम्बकीय क्षेत्र में लटकाने पर दण्ड-चुम्बक के समान ही इस पर भी एक बल-युग्म कार्य करता है, अत: यह दण्ड-चुम्बक के समान व्यवहार करती है।

Question 6 : यदि प्रश्न 5 में बताई गई परिनालिका ऊर्ध्वाधर दिशा के परितः घूमने के लिए स्वतन्त्र हो और इस पर क्षैतिज दिशा में एक 0.25 T का एकसमान चुम्बकीय-क्षेत्र लगाया जाए, तो इस परिनालिका पर लगने वाले बल आघूर्ण का परिमाण उस समय क्या होगा, जब इसकी अक्ष आरोपित क्षेत्र की दिशा से 30° का कोण बना रही हो?

Answer 6 :

बल-आघूर्ण τ = MB sin θ
τ = (0.600) x (0.25) (sin 30°)
= (0.6 x 0.25 x 0.5)
न्यूटन मीटर
= 7.5 x 10-2 
न्यूटन-मीटर

Question 7 :
एक छड़ चुम्बक जिसका चुम्बकीय-आघूर्ण 15 JT-1 है, 0.22 T के एक एकसमान चुम्बकीय-क्षेत्र के अनुदिश रखा है।
(a) एक बाह्य बल आघूर्ण कितना कार्य करेगा यदि यह चुम्बक को चुम्बकीय-क्षेत्र के
(i) लम्बवत
(ii) विपरीत दिशा में संरेखित करने के लिए घुमा दे।
(b) स्थिति
(i) एवं
(ii) में चुम्बक पर कितना बल आघूर्ण होता है।

Answer 7 :

दिया है, चुम्बक का चुम्बकीय आघूर्ण M = 1.5 जूल/टेस्ला
चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता B = 0.22 टेस्ला
θ1 = 0
(a) (i)
चुम्बक को चुम्बकीय क्षेत्र के लम्बवत् लाने के लिए
θ2 = 90°
अतः कृत कार्य W= MB [cos θ1 – cos θ2]
= 1.5 x 0.22 x [cos 0 – cos 90°]
= 1.5 x 0.22 x [1 – 0]
= 0.33
जूल

(i) चुम्बक को चुम्बकीय क्षेत्र की विपरीत दिशा में लाने के लिए
θ2 = 180°
अतः कृत कार्य W = MB [cos θ1 – cos θ2]
= 1.5 x 0.22 x [cos 0 – cos 180°]
= 1.5 x 0.22 x [1 – (-1)]
= 0.66
जूल

(b) (i) जब θ2 = 90° तब चुम्बक पर बल-आघूर्ण
t = MB sinθ
= 1.5 x 0.22 x sin 90
= 1.5 x 0.22 x 1
= 0.33
न्यूटन-मीटर

(ii) जब θ2 = 180° तब चुम्बक पर बल-आघूर्ण
t = MB sinθ
= 1.5 x 0.22 x sin 180°
= 1.5 x 0.22 x 0
= 0

Question 8 : एक परिनालिका जिसमें पास-पास 2000 फेरे लपेटे गए हैं तथा जिसके अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल 1.6 x 10-4 mहै और जिसमें 4.0 A की धारा प्रवाहित हो रही है, इसके केन्द्र से इस प्रकार लटकाई गई है कि यह एक क्षैतिज तल में घूम सके।
(a)
परिनालिका के चुम्बकीय-आघूर्ण का मान क्या है?
(b)
परिनालिका पर लगने वाला बल एवं बल आघूर्ण क्या है, यदि इस पर, इसकी अक्ष से 30° का कोण बनाता हुआ 7.5 x 10-2 Tका एकसमान क्षैतिज चुम्बकीय-क्षेत्र लगाया जाए?

Answer 8 :

यहाँ N = 2000, A = 1.6 x 10-4 m, i =4.0 A
(a)
परिनालिका का चुम्बकीय आघूर्ण, M = NiA = 2000 x 4.0 x 1.6 x 10-4 =1.28 ऐम्पियर-मीटर
(b)
धारावाही परिनालिका (अथवा चुम्बकीय द्विध्रुव) पर एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र में नेट बल सदैव शून्य होगा।
परिनालिका पर बल-आघूर्ण, τ = MB sin θ.
यहाँ B = 7.5 x 10-2 T, θ = 30°
τ = 1.28 x 7.5 x 10-2 x sin 30° = 1.28 x 7.5 x 10-2 x0.5 = 48 x 10-2 
न्यूटन-मीटर

Question 9 : एक वृत्ताकार कुंडली जिसमें 16 फेरे हैं, जिसकी त्रिज्या 10 सेमी है और जिसमें 0.75 A धारा प्रवाहित हो रही है, इस प्रकार रखी है कि इसका तल, 5.0 x 10-2 T परिमाण वाले बाह्य क्षेत्र के लम्बवत है। कुंडली, चुम्बकीय-क्षेत्र के लम्बवत और इसके अपने तल में स्थित एक अक्ष के चारों तरफ घूमने के लिए स्वतन्त्र है। यदि कुंडली को जरा-सा घुमाकर छोड़ दिया जाए तो यह अपनी स्थायी सन्तुलनावस्था के इधर-उधर 2.0 s-1 की आवृत्ति से दोलन करती है। कुंडली का अपने घूर्णन अक्ष के परितः जड़त्व-आघूर्ण क्या है?

Answer 9 : दिया है, कुण्डली की त्रिज्या r = 10 सेमी = 0.1 मीटर
कुण्डली में तार के फेरों की संख्या N = 16
कुण्डली में प्रवाहित धारा I = 0.75 ऐम्पियर
चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता B = 5.0 x 10-2 टेस्ला
कुण्डली की दोलन आवृत्ति f = 2.0 प्रति सेकण्ड

Question 10 : एक चुम्बकीय सुई चुम्बकीय याम्योत्तर के समान्तर एक ऊध्र्वाधर तल में घूमने के लिए स्वतन्त्र है। इसका उत्तरी ध्रुव क्षैतिज से 22° के कोण पर नीचे की ओर झुका है। इसे स्थान पर चुम्बकीय-क्षेत्र के क्षैतिज अवयव का मान 0.35 G है। इस स्थान पर पृथ्वी के चुम्बकीय-क्षेत्र का परिमाण ज्ञात कीजिए।

Answer 10 :




Selected

 

Chapter 5- चुम्बकत्व एवं द्रव्य (Magnetism and Matter) Contributors

krishan

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