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Chapter 6- वैद्युत चुम्बकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction) Interview Questions Answers

Question 1 : चित्र 6.1 (a) से (f) में वर्णित स्थितियों के लिए प्रेरित धारा की दिशा की प्रागुक्ति (predict) कीजिए।

Answer 1 :

(a) चुम्बक के S ध्रुव को कुण्डली की ओर ले जाया जा रहा है, अत: लेन्ज के नियम के अनुसार कुण्डली का इस ओर का सिरा भी S ध्रुव होना चाहिए ताकि यह चुम्बक की गति का विरोध करे (परस्पर प्रतिकर्षण द्वारा) इसलिए कुण्डली में प्रेरित धारा दक्षिणावर्त दिशा में अर्थात् qrpq दिशा में बहेगी।
(b) चुम्बक की गति के विरोध के लिए लेन्ज नियम के अनुसार बायीं ओर की कुण्डली का चुम्बक के ध्रुव S की ओर वाला सिरा S बनना चाहिए तथा दायीं ओर की कुण्डली का चुम्बक में N ध्रुव की ओर वाला सिरा भी S ध्रुव ही बनना चाहिए ताकि ध्रुव S पर प्रतिकर्षण तथा N पर आकर्षण बल लगे। इसलिए बायीं ओर की कुण्डली में धारा दक्षिणावर्त दिशा में (अर्थात् prqp दिशा में), तथा दायीं ओर की कुण्डली में धारा yzxy दिशा में प्रेरित होनी चाहिए।
(c) दाब कुंजी तुरन्त बन्द करने पर बायीं ओर कुण्डली में धारा शून्य से बढ़ेगी, अत: दायीं ओर की कुण्डली में प्रेरित धारा बायीं ओर कुण्डली में धारा की विपरीत दिशा में (अर्थात् वामावर्त दिशा में) yzx में होनी चाहिए।
(d) चित्र से स्पष्ट है कि धारा नियन्त्रक द्वारा प्रतिरोध घटाया जा रहा है अर्थात् दायीं ओर कुण्डली में धारा बढ़ेगी जिसकी दिशा वामावर्त है। अतः लेन्ज के नियम के अनुसार बायीं ओर कुण्डली में प्रेरित धारा मुख्य धारा के विपरीत होनी चाहिए अर्थात् zyx दिशा में।
(e) दाब कुंजी को खोलने के तुरन्त बाद प्राथमिक कुण्डली में धारा घटेगी। अतः द्वितीयक कुण्डली में धारा की दिशा प्राथमिक के मुख्य धारा की दिशा में होनी चाहिए अर्थात् xry दिशा में।
(f) कोई प्रेरित धारा नहीं चूँकि बल रेखाएँ लूप के तल में स्थित होंगी तथा फ्लक्स में परिवर्तन नहीं होगा। चूँकि बल-रेखाएँ लूप को काटेंगी भी नहीं।

Question 2 :
चित्र 6.2 में वर्णित स्थितियों के लिए लेंज के नियम का उपयोग करते हुए प्रेरित विद्युत धारा की दिशा ज्ञात कीजिए।
(a) जब अनियमित आकार का तार वृत्ताकार लूप में बदल रहा हो;
(b) जब एक वृत्ताकार लूप एक सीधे तार में विरूपित किया जा रहा हो।

Answer 2 :

(a) क्रॉस (x) द्वारा एक ऐसे चुम्बकीय-क्षेत्र को प्रदर्शित किया गया है जिसकी दिशा कागज के तल के लम्बवत् भीतर की ओर है अनियमित आकार के लूप को वृत्तीय रूप में खींचने पर इससे गुजरने वाला फ्लक्स बढ़ेगा। अतः लूप में प्रेरित धारा इस प्रकार की होगी कि वह निम्नगामी फ्लक्स को बढ़ने से रोकेगी। प्रेरित धारी कागज के तल के लम्बवत् ऊपर की ओर चुम्बकीय-क्षेत्र उत्पन्न करेगी। अत: धारा की दिशा a d c b a मार्ग का अनुसरण करेगी।
(b) चुम्बकीय-क्षेत्र कागज के तल के लम्बवत् बाहर की ओर है। लूप के आकार को बदलने पर उससे गुजरने वाला ऊर्ध्वमुखी फ्लक्स घटेगा। अत: लूप में प्रेरित धारा ऊर्ध्वमुखी चुम्बकीय-क्षेत्र उत्पन्न करेगी। इसके लिए धारा a’d’c’b’a’ मार्ग का अनुसरण करेगी।

Question 3 : एक लम्बी परिनालिका के इकाई सेंटीमीटर लम्बाई में 15 फेरे हैं। उसके अन्दर 2.0 cm का एक छोटा-सा लूप परिनालिका की अक्ष के लम्बवत रखा गया है। यदि परिनालिका में बहने वाली धारा का मान 0.15 में 2.0 A से 40 A कर दिया जाए तो धारा परिवर्तन के समय प्रेरित विद्युत वाहक बल कितना होगा?

Answer 3 :


Question 4 :
एक आयताकार लूप जिसकी भुजाएँ 8 cm एवं 2 cm हैं, एक स्थान पर थोड़ा कटा हुआ है। यह लूप अपने तल के अभिलम्बवत 0.3 T के एकसमान चुम्बकीय-क्षेत्र से बाहर की ओर निकल रहा है। यदि लूप के बाहर निकलने का वेग 1 cm s-1 है तो कटे भाग के सिरों पर उत्पन्न विद्युत वाहक बल कितना होगा, जब लूप की गति अभिलम्बवत हो
(a) लूप की लम्बी भुजा के
(b) लूप की छोटी भुजा के। प्रत्येक स्थिति में उत्पन्न प्रेरित वोल्टता कितने समय तक टिकेगी?

Answer 4 :

(a) चुम्बकीय क्षेत्र B में क्षेत्र के लम्बवत् स्थित क्षेत्रफल A से गुजरने वाला चुम्बकीय फ्लक्स Φ = BA
माना लूप की लम्बाई l व चौड़ाई b है तथा इसके वेग का परिमाण है। जैसे ही लूप लम्बी भुजा के लम्बवत् चुम्बकीय क्षेत्र से बाहर निकालता है क्षेत्र से बद्ध क्षेत्रफल बदलता है, जिससे में परिवर्तन होता है। फैराडे के नियम से, प्रेरित वैद्युत वाहक बल का परिमाण

Question 5 : 1.0 m लम्बी धातु की छड़ उसके एक सिरे से जाने वाले अभिलम्बवत अक्ष के परितः 400 rad-s-1 की कोणीय आवृत्ति से घूर्णन कर रही है। छड़ का दूसरा सिरा एक धात्विक वलय से सम्पर्कित है। अक्ष के अनुदिश सभी जगह 0.5 T का एकसमान चुम्बकीय-क्षेत्र उपस्थित है। वलय तथा अक्ष के बीच स्थापित विद्युत वाहक बल की गणना कीजिए।

Answer 5 :


Question 6 : एक वृत्ताकार कुंडली जिसकी त्रिज्या 8.0 cm तथा फेरों की संख्या 20 है अपने ऊर्ध्वाधर व्यास के परितः 50 rad-s-1 की कोणीय आवृत्ति से 3.0 x 10-2 T के एकसमान चुम्बकीय-क्षेत्र में घूम रही है। कुंडली में उत्पन्न अधिकतम तथा औसत प्रेरित विद्युत वाहक बल का मान ज्ञात कीजिए। यदि कुंडली 10 Ω प्रतिरोध का एक बन्द लूप बनाए तो कुंडली में धारा के अधिकतम मान की गणना कीजिए। जूल ऊष्मन के कारण क्षयित औसत शक्ति की गणना कीजिए। यह शक्ति कहाँ से प्राप्त होती है?

Answer 6 :