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Chapter 12- ऐल्डिहाइड कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल (Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids) Interview Questions Answers

Question 1 :
निम्नलिखित यौगिकों की संरचना लिखिए –
(i) a-मेथॉक्सीप्रोपिऑनेल्डिहाइड
(ii) 3-हाइड्रॉक्सीब्यूटेनल
(iii) 2-हाइड्रॉक्सीसाइक्लोपेन्टेन कार्बोल्डिहाइड
(iv) 4-ऑक्सोपेन्टेनल
(v) डाइ-द्वितीयक-ब्यूटिल कीटोन
(vi) 4-क्लोरोऐसीटोफीनोन।

Answer 1 :


Question 2 : निम्नलिखित अभिक्रियाओं के उत्पादों की संरचना लिखिए –

Answer 2 :


Question 3 : निम्नलिखित यौगिकों को उनके क्वथनांकों के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए
CH3CHO, CH3CH2OH, CH3OCH3,CH3CH2CH2

Answer 3 :

यौगिकों के मोलर द्रव्यमान तुलनात्मक हैं- CH3CHO (44), CH3CH2OH (46), CH3OCH3 (46),CH3CH2CH3 (44) CH3CH2OH अत्यधिक अन्तराण्विक हाइड्रोजन आबन्ध प्रदर्शित करता है, अतएव यह संयुक्त अणुओं के रूप में पाया जाता है। अतः इसका क्वथनांक उच्चतम होता है (351 K) CH3CHO के द्विध्रुव आघूर्ण (2.72 D) का मान CH3OCH3 (1.18D) से उच्च होता है, अतएव CH3CHO में द्विध्रुव-द्विधुव अन्योन्यक्रियाएँ CH3OCH3 से प्रबल होती हैं। अत: CH3CHO का क्वथनांक CH3OCH3 से उच्च होता है। CH3CH2CH3 केवल दुर्बल वाण्डर वाल बलों को प्रदर्शित करता है। CH3OCH3 में कुछ प्रबल द्विध्रुव-द्विध्रुव अन्योन्यक्रियाएँ होती हैं। अत: CH3OCH3 का क्वथनांक CH3CH2CH3 से अधिक होता है, अतएव यौगिकों के क्वथनांकों का बढ़ता क्रम निम्नवत् है
CH3CH2CH3 < CH3OCH3 3CHO < CH3CH2OH

Question 4 :
निम्नलिखित यौगिकों को नाभिकरागी योगज अभिक्रियाओं में उनकी बढ़ती हुई अभिक्रियाशीलता के क्रम में व्यवस्थित कीजिए –
1. एथेनल, प्रोपेनल, प्रोपेनोन, ब्यूटेनोन
2. बेन्जेल्डिहाइड, p-टॉलूऐल्डिहाइड, p-नाइट्रोबेन्जेल्डिहाइड, ऐसीटोफीनोन।

Answer 4 :

1. कार्बोनिल यौगिकों की नाभिकरागी योगज अभिक्रियाओं के प्रति क्रियाशीलता का बढ़ता क्रम है
ब्यूटेनोन < प्रोपेनोन < प्रोपनल < एथेनल

2. क्रियाशीलता का बढ़ता क्रम है
ऐसीटोफीनोन < p-टॉलूऐल्डिहाइड< बेन्जेल्डिहाइड < p-नाइट्रोबेन्जेल्डिहाइड
ऐसीटोफीनोन कीटोन है, जबकि अन्य सदस्य ऐल्डिहाइड हैं। अत: यह सबसे कम क्रियाशील होता है। p-टॉलूऐल्डिहाइड में CH3 समूह कार्बोनिल समूह के सापेक्ष p:स्थान पर है जो कार्बोनिल समूह के कार्बन पर अतिसंयुग्मन (hyperconjugation) प्रभाव के कारण इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ाता है और इसे बेन्जेल्डिहाइड से कम क्रियाशील बनाता है।

दूसरी ओर p-नाइट्रोबेन्जेल्डिहाइड में -NO2 समूह शक्तिशाली इलेक्ट्रॉन निष्कासक समूह है। यह अनुनाद के कारण इलेक्ट्रॉन निष्कासित करता है। अत: कार्बोनिल समूह के कार्बन परमाणु पर इलेक्ट्रॉन घनत्व घटाता है। यह नाभिकस्नेही के आक्रमण की सुविधा प्रदान करता है तथा इसे बेन्जेल्डिहाइड की तुलना में अधिक क्रियाशील बनाता है।

Question 5 : निम्नलिखित अभिक्रियाओं के उत्पादों को पहचानिए –

Answer 5 :


Question 6 : निम्नलिखित यौगिकों के आई०यू०पी०ए०सी० नाम दीजिए –

Answer 6 :

(i) 3-फेनिलप्रोपेनोइक अम्ल
(ii) 3-
मेथिलब्यूट-2-इनोइक अम्ल
(iii) 2-
मेथिलसाइक्लोपेन्टेनकार्बोक्सिलिक अम्ल
(iv) 2, 4, 6-
ट्राइनाइट्रोबेन्जोइक अम्ल

Question 7 :
निम्नलिखित यौगिकों को बेन्जोइक अम्ल में कैसे परिवर्तित किया जा सकता है?
(i) एथिल बेन्जीन
(ii) ऐसीटोफीनोन
(iii) ब्रोमोबेन्जीन
(iv) फेनिलएथीन (स्टाइरीन)।

Answer 7 :


Question 8 : नीचे प्रदर्शित अम्लों के प्रत्येक युग्म में कौन-सा अम्ल अधिक प्रबल है?
(i) CH3CO2
अथवा CH2FCO2H
(ii) CH2FCO2
अथवा CH2CICO2H
(iii) CH2FCH2CH2CO2
अथवा CH3CHFCH2CO2H

Answer 8 :