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Chapter 3- तत्त्वों का वर्गीकरण एवं गुणधर्मों में आवर्तिता (Classification of Elements and Periodici Interview Questions Answers

Question 1 : आवर्त सारणी में व्यवस्था का भौतिक आधार क्या है?

Answer 1 : आवर्त सारणी में व्यवस्था का भौतिक आधार समान गुणधर्म (भौतिक तथा रासायनिक गुण) वाले तत्वों को एकसाथ एक ही वर्ग में रखना है। चूंकि तत्वों के ये गुणधर्म मुख्यत: उनके संयोजी कोश के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास पर निर्भर करते हैं। अत: किसी समूह के तत्वों के परमाणुओं के संयोजी कोश विन्यास समान होते हैं।

Question 2 : मेंडलीव ने किस महत्त्वपूर्ण गुणधर्म को अपनी आवर्त सारणी में तत्वों के वर्गीकरण का आधार बनाया? क्या वे उस पर दृढ़ रह पाए?

Answer 2 : मेंडलीव ने परमाणु भार को, तत्त्वों के वर्गीकरण का आधार माना तथा तत्त्वों को बढ़ते हुए परमाणु भार के क्रम में व्यवस्थित किया। वह अपने आधार पर निष्ठापूर्वक दृढ़ रहे तथा उन्होंने उन तत्त्वों के लिए रिक्त स्थान छोड़ा जो उस समय ज्ञात नहीं थे तथा उनके परमाणु भारों के आधार पर, उनके लक्षणों या गुणों की भविष्यवाणी की। उनकी भविष्यवाणियाँ उन तत्त्वों की खोज होने पर सत्य पायी गयीं।

Question 3 : मेंडलीव के आवर्त नियम और आधुनिक आवर्त नियम में मौलिक अन्तर क्या है?

Answer 3 : मेंडलीव का आवर्त नियम तत्त्वों के परमाणु भारों पर आधारित है, जबकि आधुनिक आवर्त नियम तत्त्वों के परमाणु क्रमांकों पर आधारित है। इस प्रकार मौलिक अन्तर वर्गीकरण का आधार है।

Question 4 : क्वाण्टम संख्याओं के आधार पर यह सिद्ध कीजिए कि आवर्त सारणी के छठवें आवर्त में 32 तत्व होने चाहिए।

Answer 4 :

आवर्त सारणी के दीर्घ रूप में प्रत्येक आवर्त एक नई कक्षा के भरने से प्रारम्भ होता है। छठवाँ आवर्त (मुख्य क्वाण्टम संख्या = 6)n = 6 से प्रारम्भ होता है। इस कक्ष के लिए, n= 6 तथा != 0,1, 2 तथा 3 होगा (उच्च मान आदेशित नहीं है)।
इस प्रकार, उपकक्षाएँ 6s, 6p, 6d तथा 6 इलेक्ट्रॉनों के समावेशन के लिए उपलब्ध हैं। किन्तु आँफबाऊ के नियमानुसार 6d तथा 6/-उपकक्षाओं की ऊर्जा 7s-उपकक्षाओं की तुलना में अधिक होती है। इसलिए यह कक्षाएँ 7s उपकक्षाओं के भरने तक नहीं भरती हैं। इसके अतिरिक्त 5d- तथा 4- उपकक्षाओं की ऊर्जाएँ 6p- उपकक्षाओं से कम होती हैं। इसलिए, छठवें आवर्त में, इलेक्ट्रॉन्स केवल 6s, 4,5d तथा 6p- उपकक्षाओं में भरते हैं। इन उपकक्षाओं में इलेक्ट्रॉन्स की संख्याएँ क्रमशः 2, 14, 10 तथा 6 होती हैं अर्थात् कुल 32 इलेक्ट्रॉन्स होते हैं। इसी कारण छठवें आवर्त में 32 तत्त्व होते।

Question 5 : आवर्त और वर्ग के पदों में यह बताइए कि z = 14 कहाँ स्थित होगा?

Answer 5 : z=114 तत्त्व का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास निम्न है-

यह स्पष्ट है कि दिया तत्त्व एक सामान्य तत्त्व है तथा आवर्त सारणी के p-ब्लॉक से सम्बन्धित है।’ चूँकि इस तत्त्व में n = 7 कक्ष में इलेक्ट्रॉन उपस्थित हैं, अत: यह आवर्त सारणी के सातवें आवर्त में स्थित होगा। इसके अतिरिक्त समूह की संख्या = 10+ संयोजी इलेक्ट्रॉनों की संख्या
= 10 +4 = 14
अतः दिया गया तत्त्व सातवें आवर्त में तथा समूह 14 में स्थित है।

Question 6 : उस तत्व का परमाणु क्रमांक लिखिए, जो आवर्त सारणी में तीसरे आवर्त और 17वें वर्ग में स्थित होता है।

Answer 6 : तीसरे आवर्त में केवल 3- तथा 3p-कक्षाएँ भरती हैं। अत: आवर्त में केवल दो – तथा छः p-ब्लॉक के तत्त्व होते हैं। तीसरा आवर्त Z=11 से प्रारम्भ होकर Z= 18 पर समाप्त होता है। अतः Z=11 तथा Z= 12 के तत्त्व -ब्लॉक में स्थित होंगे। अगले छः तत्त्व Z = 13 (समूह 13) से Z= 18 (समूह 18)p-ब्लॉक के तत्त्व हैं। इसलिए वह तत्त्व जो 17वें समूह में स्थित है उसका परमाणु क्रमांक Z = 17 होगा।

Question 7 :
कौन-से तत्व का नाम निम्नलिखित द्वारा दिया गया है?
(i) लॉरेन्स बर्कले प्रयोगशाला द्वारा
(ii) सी बोर्ग समूह द्वारा।

Answer 7 :

1. लॉरेन्सियम (Lawrencium) (Z=103) तथा बर्केलियम (Berkelium) (Z=97)
2. सीबोर्गीयम (Seaborgium) (Z = 106)

Question 8 : एक ही वर्ग में उपस्थित तत्वों के भौतिक और रासायनिक गुणधर्म समान क्यों होते हैं?

Answer 8 : एक ही वर्ग में उपस्थित तत्त्वों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास समान होते हैं अर्थात् उनकी संयोजी कक्षा में इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है। इसी कारण से एक ही वर्ग में उपस्थित तत्त्वों के भौतिक तथा रासायनिक गुणधर्म समान होते हैं।

Question 9 : परमाणु त्रिज्या’ और ‘आयनिक त्रिज्या से आप क्या समझते हैं?

Answer 9 : परमाणु त्रिज्या से तात्पर्य परमाणु का आकार है, जो परमाणु के नाभिक के केन्द्र से बाह्यतम कक्षा के इलेक्ट्रॉन की दूरी के बराबर मानी जाती है। किसी आयन की ‘आयनिक त्रिज्या’ उसके नाभिक तथा उस बिन्दु के मध्य की दूरी को माना जाता है जिस पर नाभिक का प्रभाव आयन के इलेक्ट्रॉन मेघ पर प्रभावी होता है।

Question 10 : किसी वर्ग या आवर्त में परमाणु त्रिज्या किस प्रकार परिवर्तित होती है? इस परिवर्तन की व्याख्या आप किस प्रकार करेंगे?

Answer 10 : आवर्त में परमाणु त्रिज्याएँ (Atomic Radii in Periods) किसी आवर्त में बाएँ से दाएँ चलने पर परमाणु त्रिज्याएँ नियमित क्रम में क्षार धातु से हैलोजेन तक घटती हैं; क्योंकि नाभिकीय आवेश बढ़ने के साथ-साथ बाह्यतम कोश के इलेक्ट्रॉनों की संख्या भी बढ़ती है, फलस्वरूप बाह्यतम कोश के इलेक्ट्रॉनों को आकर्षित करने की क्षमता भी बढ़ती है। इस कारण इनकी नाभिक व बाह्यतमं कोशों के बीच की दूरी क्रमशः घटती है; अत: परमाणु त्रिज्या घटती है। (यह ध्यान देने योग्य है कि यहाँ उत्कृष्ट गैसों की परमाणु त्रिज्या पर विचार नहीं किया जा रहा है। एकल परमाणु होने के कारण उनकी आबन्धित त्रिज्या बहुत अधिक है। इसलिए उत्कृष्ट गैसों की तुलना दूसरे तत्वों की सहसंयोजक त्रिज्या से न करके वाण्डरवाल्स त्रिज्या से करते हैं।)

कुछ तत्वों के लिए परमाणु त्रिज्या का मान निम्नांकित सारणी-1 में दिया गया है-

द्वितीय आवर्त में परमाणु त्रिज्या में परमाणु क्रमांक के साथ परिवर्तन चित्र-1 में प्रदर्शित वक्र द्वारा और अधिक स्पष्ट होता है। वक्र में स्पष्ट प्रदर्शित है कि नितान्त बाईं ओर स्थित क्षार धातु (Li) की परमाणु त्रिज्या अधिकतम तथा नितान्त दाईं ओर स्थित हैलोजेन (F) की परमाणु त्रिज्या का मान न्यूनतम है।

वर्ग में परमाणु त्रिज्याएँ (Atomic radii in Groups)
किसी वर्ग में ऊपर से नीचे चलने पर परमाणु त्रिज्याएँ बढ़ती हैं; क्योंकि जैसे-जैसे नाभिकीय आवेश बढ़ता है, इलेक्ट्रॉनिक कोशों की संख्या बढ़ती जाती है, फलस्वरूप बाह्यतम कोश के इलेक्ट्रॉनों को आकर्षित करने की क्षमता घटती है; अत: परमाणु त्रिज्या बढ़ती है।
निम्नांकित सारणी-2 में धातुओं तथा हैलोजेन तत्वों के लिए परमाणु त्रिज्याएँ दी गई हैं

वर्ग में परमाणु क्रमांकों के साथ क्षार धातुओं तथा हैलोजेनों की परमाणु त्रिज्याओं में परिवर्तन चित्र-2 में प्रदर्शित वक्र द्वारा और अधिक स्पष्ट होता है। मानों से यह स्पष्ट है कि लीथियम (Li) की परमाणु त्रिज्या न्यूनतम तथा सीजियम (Cs) की अधिकतम है। इसी प्रकार हैलोजेनों में फ्लुओरीन (F) की परमाणु त्रिज्या न्यूनतम तथा आयोडीन (I) की अधिकतम है।


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Chapter 3- तत्त्वों का वर्गीकरण एवं गुणधर्मों में आवर्तिता (Classification of Elements and Periodici Contributors

krishan

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