• +91 9971497814
  • info@interviewmaterial.com

Chapter 20- गमन एवं संचलन (Locomotion and Movement) Interview Questions Answers

Related Subjects

Question 1 : कंकाल पेशी के एक सार्कोमियर का चित्र बनाइए और विभिन्न भागों को चिह्नित कीजिए।

Answer 1 : कंकाल पेशी के सार्कीमियर की संरचना

Question 2 : पेशी संकुचन के सप तन्तु सिद्धान्त को परिभाषित कीजिए।

Answer 2 :

हक्सले (Huxley,1954)
ने रेखित पेशी तन्तुओं का इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी द्वारा अध्ययन करके इनमें उपस्थित एक्टिन तथा मायोसिन छड़ों (actin and myosin filaments) का विशिष्ट विन्यास देखा। इस विन्यास को देखते हुए इन्होंने पेशी तन्तु संकुचन का सप तन्तु या छड़ विसर्पण सिद्धान्त (sliding filament theory) दिया।
रेखित पेशियों के संकुचन की कार्य-विधि
रेखित पेशियों में संकुचन तन्त्रिका उद्दीपन के फलस्वरूप होता है। एक्टिन छड़े मायोसिन छड़ों के ऊपर फिसलकर इनके भीतर (सामियर के केन्द्र की ओर) प्रवेश कर जाती हैं, जिससे पेशी तन्तु में संकुचन हो जाता है।
पेशी संकुचन का सप तन्तु या छड़ विसर्पण सिद्धान्त
सामान्य अवस्था में सार्कोमियर (sarcomere) में ATP तथा मैग्नीशियम आयन होते हैं; कैल्सियम आयन भी सूक्ष्म मात्रा में होते हैं। एक्टिन छड़े ट्रोपोमायोसिन (tropomyosin) के साथ इस प्रकार जुड़ी रहती हैं कि ये मायोसिन छड़ों के साथ नहीं जुड़ सकतीं। जब पेशी तन्तु को तन्त्रिका आवेग द्वारा श्रेशहोल्ड उद्दीपन (threshold stimulus) प्राप्त होता है, तब पेशी तन्तु के अन्तर्द्रव्यीय जाल (ER) से Ca++ (कैल्सियम आयन) सार्कोमियर में मुक्त हो जाते हैं। ये कैल्सियम आयन ट्रोपोमायोसिन के साथ संयुक्त (bind) हो जाते हैं और एक्टिन छड़े (actin filaments) स्वतन्त्र हो जाती हैं। इसी समय ATP के जल विघटन (hydrolysis) के फलस्वरूप ऊर्जा मुक्त होती है। इस ऊर्जा की उपस्थिति में एक्टिने तथा मायोसिन सक्रिय हो जाते हैं और नए सेतु बन्धों (across bridges) की रचना होती है। इसके फलस्वरूप एक्टिन छड़े मायोसिन छड़ों के ऊपर फिसलकर साकमियर के केन्द्र की ओर चली जाती हैं। एक्टिन तथा मायोसिन मिलकर एक्टोमायोसिन (actomyosin) की रचना करते हैं।
इस प्रक्रिया में पेशी तन्तु की लम्बाई कम हो जाती है अर्थात् संकुचन हो जाता है। जब उद्दीपन समाप्त हो जाता है, तब सक्रिय पम्पिंग द्वारा कैल्सियम आयनों को अन्तर्रव्यीय जाल में पम्प कर दिया जाता है। ट्रोपोमायोसिन स्वतन्त्र हो जाता है, इससे एक्टिन व मायोसिन के बीच के सेतु बन्ध टूट जाते हैं। एक्टिन फिर ट्रोपोमायोसिन के साथ संयुक्त (bind) हो जाता है। पेशी तन्तु वापस अपनी पुरानी लम्बाई में लौट आता है। मृत्यु के पश्चात् ATP के न बनने के कारण Ca++ वापस सार्कोप्लाज्मिक जाल में नहीं जा सकते; अतः पेशियाँ सिकुड़ी रह जाती हैं और शरीर अकड़ा रह जाता
ऊर्जा आपूर्ति (Energy supply) :
पेशी संकुचन के लिए ऊर्जा की आपूर्ति ATP द्वारा होती है। पेशियों में ATP का निर्माण ग्लाइकोजन के अपचय (catabolism) के फलस्वरूप होता है।
पेशी संकुचन के समय ATP के जल विघटन (hydrolysis) से ऊर्जा की प्राप्ति होती है।
पेशियों में एक और उच्च ऊर्जा यौगिक उपस्थित होता है, जिसे क्रिएटिन फॉस्फेट (creatine phosphate-PCr) कहते हैं। इसका प्रयोग भी ATP निर्माण में होता है।
विश्रामावस्था में ATP द्वारा फिर से क्रिएटिन फॉस्फेट का निर्माण हो जाता है।
इस प्रकार पेशी में क्रिएटिन फॉस्फेट का भण्डार बना रहता है, जो आवश्यकता पड़ने पर ATP प्रदान कर सकता है।

Question 3 : पेशी संकुचन के प्रमुख चरणों का वर्णन कीजिए।

Answer 3 :

[संकेत-कृपया उपर्युक्त प्रश्न 2 का उत्तर देखें]

Question 4 :
‘सही’ या ‘गलत लिखें
(क) एक्टिन पतले तन्तु में स्थित होता है।
(ख) रेखित पेशी रेशे का H-क्षेत्र मोटे और पतले, दोनों तन्तुओं को प्रदर्शित करता है।
(ग) मानव कंकाल में 206 अस्थियाँ होती हैं।
(घ) मनुष्य में 11 जोड़ी पसलियाँ होती हैं।
(ङ) उरोस्थि शरीर के अधर भाग में स्थित होती है।

Answer 4 :

(क) सही
(ख) गलत
(ग) सही
(घ) गलत
(ङ) सही।

Question 5 :
इनके बीच अन्तर बताइए
(क) एक्टिन और मायोसिन
(ख) लाल और श्वेत पेशियाँ
(ग) अंस और श्रोणि मेखला।

Answer 5 :

(क)
एक्टिन और मायोसिन में अन्तर
 (ख)
लाल तथा श्वेत पेशियों में अन्तर
  (ग)
अंस तथा श्रोशिमेखला में अन्तर 

Question 6 :
स्तम्भ I का स्तम्भ II से मिलान करें
स्तम्भ-I                      स्तम्भ-II
(i) चिकनी पेशी         (क) मायोग्लोबिन
(ii) ट्रोपोमायोसिन     (ख) पतले तन्तु
(iii) लाल पेशी          (ग) सीवन (suture)
(iv) कपाल               (घ) अनैच्छिक

Answer 6 :

(i) (घ)
(ii) (ख)
(iii) (क)
(iv) (ग)

Question 7 : मानव शरीर की कोशिकाओं द्वारा प्रदर्शित विभिन्न गतियाँ कौन-सी हैं?

Answer 7 :

मानव शरीर की कोशिकाओं में मुख्यत: निम्नलिखित तीन प्रकार की गतियाँ होती हैं
1. अमीबीय या कूटपादी गति (Amoeboid or Pseudopodial Movement) :
मानव शरीर में पाई जाने वाली श्वेत रुधिराणु (leucocytes) एवं महाभक्षकाणु (macrophages) कोशिकाएँ कूटपाद द्वारा अमीबा की भाँति गति करती हैं।
2. पक्ष्माभी गति (Ciliary movement) :
स्तनियों (मानव) में शुक्रवाहिनियों, अण्डवाहिनियों, श्वास नाल में पक्ष्माभ (cilia) पाए जाते हैं। इनकी गति से शुक्रवाहिनियों में शुक्राणु और अण्डवाहिनियों में अण्डाणु का परिवहन होता है। श्वासनाल के पक्ष्माभ श्लेष्मा को बाहर की ओर धकेलते हैं।
3. पेशीय गति (Muscular Movement) :
हमारे उपांगों (अग्रपाद, पश्चपाद), जबड़ों, जिह्वा, नेत्रपेशियों, आहारनाल, हृदय आदि में पेशीय गति होती है। पेशीय गति में कंकाल, पेशियाँ तथा तन्त्रिकाएँ सम्मलित होती हैं।
1. नेत्र गोलक-नेत्र कोटर में अरेखित पेशियों द्वारा गति करता है। आइरिस तथा सिलियरी काय (iris and ciliary body) पेशियाँ नेत्र में जाने वाले प्रकाश की मात्रा का नियमन करती हैं।
2. हृदय की हृदपेशियाँ तथा रक्त वाहिनियों की अरेखित पेशियाँ रक्त परिसंचरण में सहायक होती हैं।
3. डायफ्राम तथा पसलियों के मध्य स्थित अरेखित पेशियों के संकुचन एवं शिथिलन के फलस्वरूप श्वास क्रिया (breathing) सम्पन्न होती है।
4. आहारनाल की पेशियों में क्रमाकुचन गतियों के कारण भोजन आगे खिसकता है। भोजन की लुगदी (chyme) बनती है।
5. कंकालीय पेशियाँ (skeletal muscles) कंकाल से जुड़ी होती हैं। प्रचलन एवं अंगों की गति से ये सीधे सम्बन्धित होती हैं। कंकाल या रेखित पेशियों के संकुचन एवं शिथिलन के कारण प्रचलन/गति होती है।

Question 8 : आप किस प्रकार से एक कंकाल पेशी और हृद पेशी में विभेद करेंगे?

Answer 8 : कंकाल (रेखिल):मेशी.और हृद पेशी में अन्तर