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Chapter 4- निर्धनता Interview Questions Answers

Question 1 :
निर्धनता की परिभाषा दीजिए।

Answer 1 :

शाहीन रफी खान और डेनियन किल्लेन के शब्दों में-“निर्धनता भूख है। निर्धनता बीमार होने पर चिकित्सक को न दिखा पाने की विवशता है। निर्धनता स्कूल में न जा जाने और निरक्षर रह जाने का नाम है। निर्धनता बेरोजगारी है। निर्धनता भविष्य के प्रति भय है; निर्धनता दिन में एक बार भोजन पाना है। निर्धनता अपने बच्चे को उस बीमारी से मरते देखने को कहते हैं जो अस्वच्छ पानी पीने से होती है। निर्धनता शक्ति, प्रतिनिधित्वहीनता और स्वतंत्रता की हीनता का नाम है।” संक्षेप में, निर्धनता से अभिप्राय है-“जीवन, स्वास्थ्य और कार्यकुशलता के लिए न्यूनतम उपभोग आवश्यकताओं की प्राप्ति की अयोग्यता।”

Question 2 :
काम के बदले अनाज कार्यक्रम का क्या अर्थ है?

Answer 2 :

‘काम के बदले अनाज’ कार्यक्रम देश के 150 सर्वाधिक पिछड़े जिलों में इस उद्देश्य के साथ शुरू किया गया ताकि पूरक वेतन रोजगार के सृजन को बढ़ाया जा सके। इस कार्यक्रम के अंतर्गत मुख्यतः जल संरक्षण, सूखे से सुरक्षा और भूमि विकास संबंधी कार्य सम्पन्न कराए जाते हैं और मजदूरी के न्यूनतम 25% का भुगतान नकद राशि में तथा शेष भुगतान अनाज के रूप में किया जाता है। इस योजना के अंतर्गत देश में प्रत्येक परिवार के एक सक्षम व्यक्ति को 100 दिनों के लिए न्यूनतम मजदूरी पर रोजगार देने का प्रावधान है। यह कार्यक्रम शत-प्रतिशत केन्द्र प्रायोजित है।

Question 3 :
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वरोजगार का एक-एक उदाहरण दें।

Answer 3 :

ग्रामीण क्षेत्र में जब एक किसान अपनी भूमि पर अपने निजी संसाधनों का प्रयोग करके फसलों का उत्पादन करता है तो यह स्वरोजगार कहलाएगा। इस प्रकार शहरी क्षेत्र में जब कोई आदमी एक दुकान खोलकर उसे चलाता है तो वह भी स्वरोजगार श्रमिक कहलाएगा।

Question 4 :
आय अर्जित करने वाली परिसम्पत्तियों के सृजन से निर्धनता की समस्या का समाधान किस प्रकार हो सकता है?

Answer 4 :

निर्धनों के विकास के लिए विकल्पों की खोज के क्रम में नीति निर्धारकों को लगा कि वर्धनशील परिसम्पत्तियों और कार्य सृजन के साधनों द्वारा निर्धनों के लिए आय और रोजगार को बढ़ाया जा सकता है। इस नीति को तृतीय पंचवर्षीय योजना से आरम्भ किया गया। इस कार्यक्रम के अंतर्गत छोटे उद्योग लगाने के लिए बैंक ऋणों के माध्यम से वित्तीय सहयोग उपलब्ध कराया जाता है। भूमिहीनों को भूमि आवंटित करके रोजगार के अधिक अवसरों का सृजन होता है। वित्तीय सहायता, भूमि एवं अन्य परिसम्पत्तियों के अर्जन से रोजगार के अवसरों में वृद्धि होती है तथा आमदनी बढ़ती है, जिससे निर्धनता की समस्या हल होती है।

Question 5 :
भारत सरकार द्वारा निर्धनता पर त्रि-आयामी प्रहार की संक्षेप में व्याख्या कीजिए।

Answer 5 :

भारत सरकार ने निर्धनता निवारण के लिए त्रि-आयामी नीति अपनाई, जिसका विवरण इस प्रकार है
1. संवृद्धि आधारित रणनीति- यह इस आशा पर आधारित है कि आर्थिक संवृद्धि (अर्थात् सकल घरेलू उत्पाद और प्रति व्यक्ति आय में तीव्र वृद्धि) के प्रभाव समाज के सभी वर्गों तक पहुँच जाएँगे। यह माना जा रहा था कि तीव्र दर से औद्योगिक विकास और चुने हुए क्षेत्रों में हरित क्रांति के माध्यम से कृषि का पूर्ण कार्याकल्प हो जाएगा। परंतु जनसंख्या वृद्धि के परिणामस्वरूस प्रति व्यक्ति आय में बहुत कमी आई जिस कारण धनी और निर्धन के बीच की दूरी और बढ़ गई।

2. वर्धनशील परिसम्पत्तियों और कार्य का सृजन- प्रथम आयाम की असफलता के बाद नीति-निर्धारकों को ऐसा लगा कि वर्धनशील परिसम्पत्तियों और कार्य सृजन के साधनों द्वारा निर्धनों के लिए आय और रोजगार को बढ़ाया जा सकता है। इस दूसरी नीति को द्वितीय पंचवर्षी योजना से आरम्भ किया गया। स्वरोजगार एवं मजदूरी आधारित रोजगार कार्यक्रमों को निर्धनता भगाने का मुख्य माध्यम माना जाता है। स्वरोजगार कार्यक्रमों के उदाहरण हैं—ग्रामीण रोजगार सृजन कार्यक्रम (REGP), प्रधानमंत्री रोजगार योजना (PMRY) तथा स्वर्णजयंती शहरी रोजगार योजना (SJSRY)। इन रोजगार कार्यक्रमों एवं वित्तीय सहायता के माध्यम से निम्न आय वर्ग के लोगों को आय अर्जित करने के अवसर प्राप्त हुए हैं।

3. न्यूनतम आधारभूत सुविधाएँ– निर्धनता निवारण की दिशा में तीसरा आयाम न्यूनतम आधारभूत सुविधाएँ उपलब्ध कराना है। इस नीति के अंतर्गत उपभोग, रोजगार के अवसर, स्वास्थ्य एवं शिक्षा में आपूर्ति बढ़ाने पर बल दिया गया। निर्धनों के खाद्य उपभोग और पोषण-स्तर को प्रभावित करने वाले तीन प्रमुख कार्यक्रम हैं—सार्वजनिक वितरण व्यवस्था, एकीकृत बाल विकास योजना तथा मध्यावकाश भोजन योजना। बेसहारा बुजुर्गों एवं निर्धन महिलाओं के लिए भी सामाजिक सहायता अभियान चलाए जा रहे हैं।

Question 6 :
सरकार ने बुजुर्गों, निर्धनों और असहाय महिलाओं के सहायतार्थ कौन-से कार्यक्रम अपनाए हैं?

Answer 6 :

सरकार ने बुजुर्गों, निर्धनों और असहाय महिलाओं की सहायतार्थ निम्नलिखित कार्यक्रम अपनाए हैं-सामाजिक सुरक्षा बीमा योजना (1989-80 ई०), राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना (1994-95 ई०), राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना (1994-95 ई०), राष्ट्रीय मातृत्व लाभ योजना (1994-95 ई०), प्रजनन एवं बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (1997-98 ई०), लक्ष्य आधारित खाद्यान्न वितरण कार्यक्रम (1997-98 ई०), महिला सर्वशक्ति योजना (1998-99 ई०), अन्नपूर्णा योजना (2001 ई०), महिला स्वयंसिद्ध योजना (2001-02 ई०), महिला स्वाधार योजना (2001-02 ई०), वरिष्ठ पेंशन बीमा योजना (2003-04 ई०), जननी सुरक्षा योजना (2003-04 ई०), सार्वजनिक स्वास्थ्य बीमा योजना (2003-04 ई०), आशा योजना (2005 ई०), एकल बालिका नि:शुल्क शिक्षा योजना (2005 ई०), राजीव गांधी किशोरी सशक्तिकरण स्कीम-सबला (2010-11 ई०), इन्दिरागांधी मातृत्व सहयोग योजना (2010-11 ई०)।

Question 7 :
क्या निर्धनता और बेरोजगारी में कोई संबंध होता है? समझाए।

Answer 7 :

निर्धनता का संबंध व्यक्ति के रोजगार एवं उसके स्वरूप से भी होता है; जैसे—बेरोजगारी, अल्परोजगार, कभी-कभी काम मिलना आदि। अधिकांश शहरी निर्धन या तो बेरोजगार हैं या अनियमित मजदूर हैं, जिन्हें कभी-कभी रोजगार मिलता है। ये अनियमित मजदूर समाज के बहुत ही दयनीय सदस्य हैं। क्योंकि इनके पास रोजगार सुरक्षा, परिसम्पत्तियाँ, वांछित कार्य-कौशल, पर्याप्त अवसर तथा निर्वाह के लिए अधिशेष नहीं होते हैं। इसीलिए भारत सरकार ने अकुशल श्रमिकों के लिए रोजगार कार्यक्रम आरम्भ किए। इसी क्रम में 1970 ई० के दशक में चलाया गया ‘काम के बदले अनाज’ एक महत्त्वपूर्ण कार्यक्रम रही। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले अकुशल निर्धन लोगों के लिए मजदूरी पर रोजगार के सृजन के लिए भी सरकार के पास अनेक कार्यक्रम हैं। इनमें से प्रमुख हैं-राष्ट्रीय काम के बदले अनाज कार्यक्रम तथा सम्पूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना।

Question 8 :
सापेक्ष और निरपेक्ष निर्धनता में क्या अंतर है?

Answer 8 :

सापेक्ष निर्धनता– सापेक्ष निर्धनता से अभिप्राय विभिन्न वर्गों, प्रदेशों या दूसरे देशों की तुलना में पायी जाने वाली निर्धनता से है। जिस देश या वर्ग के लोगों का जीवन निर्वाह स्तर निम्न होता है वे उच्च निर्वाह स्तर के लोगों या देशों की तुलना में गरीब या सापेक्ष रूप से निर्धन माने जाते हैं।

निरपेक्ष निर्धनता- निरपेक्ष निर्धनता से अभिप्राय किसी देश की आर्थिक अवस्था को ध्यान में रखते हुए निर्धनता के माप से है। भारत में निरपेक्ष निर्धनता का अनुमान लगाने के लिए निर्धनता रेखा की धारणा का प्रयोग किया जाता है। निर्धनता रेखा वह है जो उस प्रति व्यक्ति औसत मासिक व्यय को प्रकट करती है जिसके द्वारा लोग अपनी न्यूनतम आवश्यकताओं को संतुष्ट कर सकते हैं। भारत की कीमतों के आधार पर ३ 328 ग्रामीण क्षेत्र में तथा १ 454 शहरी क्षेत्र में प्रति मास उपभोग को निर्धनता रेखा माना गया है। जिन लोगों का प्रति माह उपभोग व्यय इससे कम है उन्हें निर्धन माना जाता है। कैलोरी की दृष्टि से निर्धनता रेखा की सीमा ग्रामीण क्षेत्रों में 2400 कैलोरी और शहरी क्षेत्रों में 2100 कैलोरी है।

Question 9 :
मान लीजिए कि आप एक निर्धन परिवार से हैं और छोटी सी दुकान खोलने के लिए सरकारी सहायता पाना चाहते हैं। आप किस योजना के अंतर्गत आवेदन देंगे और क्यों? ”

Answer 9 :

स्वरोजगार कार्यक्रम के अंतर्गत निर्धन परिवार का कोई भी शिक्षित सदस्य किसी भी प्रकार की छोटी दुकान चलाने के लिए सरकार से वित्तीय सहायता प्राप्त कर सकता है। पूर्व रोजगार कार्यक्रमों के तहत परिवारों और व्यक्तियों को वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है, पर नब्बे के दशक से इस नीति में बदलाव आया है। अब इन कार्यक्रमों का लाभ चाहने वालों को स्वयं सहायता समूहों का गठन करने के लिए प्रेरित किया जाता है। प्रारम्भ में उन्हें अपनी ही बचतों को एकत्र कर परस्पर उधार देने को प्रोत्साहित किया जाता है। और बाद में सरकार ‘बैंकों के माध्यम से उन स्वयं सहायता समूहों को आंशिक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराती है। ये समूह ही निश्चित करते हैं कि किसे ऋण दिया जाए।

Question 10 :
ग्रामीण और शहरी बेरोजगारी में अंतर स्पष्ट करें। क्या यह कहना सही होगा कि निर्धनता गाँवों से शहरों में आ गई है? अपने उत्तर के पक्ष में निर्धनता अनुपात प्रवृत्ति का प्रयोग करें।

Answer 10 :

दिए गए तालिका’और चित्र भारत में निर्धनता प्रवृत्तियों के ग्रामीण-शहरी परिदृश्य को प्रस्तुत करते हैं। ग्रामीण क्षेत्र में पायी जाने वाली निर्धनता शहरी निर्धनता की तुलना में अभी भी अधिक है।
तालिका : गरीबी की जनगणना का अनुपात-ग्रामीण, शहरी व कुल (प्रतिशत में)
इन आँकड़ों से निम्नलिखित निष्कर्ष निकालते हैं
  1. ग्रामीण निर्धनता 1972-73 ई० में 54% से घटकर 1999- 2000 में 27.09% हो गई थी।
  2. शहरी निर्धनता भी 1972-73 ई० में 42% से गिरकर 23.62% हो गई थी।
  3. गाँवों में गरीबी का स्तर शहरों से ज्यादा है।
  4. 1993-94 ई० तथा 1999-2000 ई० में गरीबी के स्तर में सराहनीय,कमी आई।


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Chapter 4- निर्धनता Contributors

krishan

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