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Chapter 2- संसाधन के रूप में लोग Interview Questions Answers

Question 1 :
‘संसाधन के रूप में लोग’ से आप क्या समझते हैं?

Answer 1 :

किसी देश के लोग उस देश के लिए बहुमूल्य संसाधन होते हैं, यदि वे स्वस्थ्य, शिक्षित एवं कुशल हों, क्योंकि मानवीय संसाधन के बिना आर्थिक क्रियाएँ संभव नहीं हैं। मानव, श्रमिक, प्रबन्धक एवं उद्यमी के रूप में समस्त आर्थिक क्रियाओं का संपादन करता है। इसे मानव संसाधन भी कहते हैं।

Question 2 :
मानव संसाधन भूमि और भौतिक पूँजी जैसे अन्य संसाधनों से कैसे भिन्न है?

Answer 2 :

मानवीय संसाधन अन्य संसाधनों से इस प्रकार भिन्न है

  1. मानवीय संसाधन उत्पादन का एक अत्याज्य (Indispensable) साधन है।
  2. मानवीय संसाधन श्रम, प्रबंध एवं उद्यमी के रूप में कार्य करता है।
  3.  मानवीय संसाधन उत्पादन को एक जीवित, क्रियाशील एवं भावुक साधन है।
  4.  मानवीय संसाधन कार्य कराता है और अन्य साधनों को कार्यशील करता है।

Question 3 :
मानव पूँजी निर्माण में शिक्षा की क्या भूमिका है?

Answer 3 :

मानव पूंजी (मानव संसाधन) निर्माण में शिक्षा की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। शिक्षा एवं कौशल किसी व्यक्ति की आय को निर्धारित करने वाले प्रमुख कारक हैं। किसी बच्चे की शिक्षा और प्रशिक्षण पर किए गए निवेश के बदले में वह भविष्य में अपेक्षाकृत अधिक आय एवं समाज में बेहतर योगदान के रूप में उच्च प्रतिफल दे सकता है। शिक्षित लोग अपने बच्चों की शिक्षा पर अधिक निवेश करते पाए जाते हैं।
इसका कारण यह है कि उन्होंने स्वयं के लिए शिक्षा का महत्त्व जान लिया है। यह कहने की आवश्यकता नहीं है कि यह शिक्षा ही है जो एक व्यक्ति को उसके सामने उपलब्ध आर्थिक अवसरों का बेहतर उपयोग करने में सहायता करती है। शिक्षा श्रम की गुणवत्ता में वृद्धि करती है और कुल उत्पादकता में वृद्धि करने में सहायता करती है। कुल उत्पादकता देश के विकास में योगदान देती है।

Question 4 :
मानव पूंजी निर्माण में स्वास्थ्य की क्या भूमिका है?

Answer 4 :

मानव पूंजी निर्माण अथवा मानव संसाधन विकास में स्वास्थ्य की प्रमुख भूमिका है, जिसे हम निम्न रूप में प्रस्तुत कर सकते हैं

  1. किसी व्यक्ति का स्वास्थ्य अपनी क्षमता एवं बीमारी से लड़ने की योग्यता को पहचानने में सहायता करता है।
  2. केवल एक पूर्णतः स्वस्थ व्यक्ति ही अपने काम के साथ न्याय कर सकता है। इस प्रकार यह किसी व्यक्ति के कामकाजी जीवन में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करता है।
  3. एक अस्वस्थ व्यक्ति अपने परिवार, संगठन एवं देश के लिए दायित्व है। कोई भी संगठन ऐसे व्यक्ति को काम पर नहीं रखेगा जो खराव स्वास्थ्य के कारण पूरी दक्षता से काम न कर सके।
  4.  स्वास्थ्य न केवल किसी व्यक्ति के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाता है अपितु मानव संसाधन विकास में वर्धन करता है जिस पर देश के कई क्षेत्रक निर्भर करते हैं।

Question 5 :
किसी व्यक्ति के कामयाब जीवन में स्वास्थ्य की क्या भूमिका है?

Answer 5 :

स्वास्थ्य मानव को स्वस्थ, सक्रिय, शक्तिशाली एवं कार्य कुशल बनाता है। यह सही कहा गया है कि एक स्वस्थ शरीर में एक स्वस्थ दिमाग होता है। अच्छा स्वास्थ्य एवं मानसिक जागरुकता एक मूल्यवान परिसंपत्ति है जो मानवीय संसाधन को देश के लिए एक संपत्ति बनाती है। स्वास्थ्य जीवन का एक महत्त्वपूर्ण पहलू है। स्वास्थ्य का अर्थ जीवित रहना मात्र ही नहीं है।
स्वास्थ्य में शारीरिक, मानसिक, आर्थिक एवं सामाजिक सुदृढ़ता शामिल हैं। स्वास्थ्य में परिवार कल्याण, जनसंख्या नियंत्रण, दवा नियंत्रण, प्रतिरक्षण एवं खाद्य मिलावट निवारण आदि बहुत से क्रियाकलाप शामिल हैं यदि कोई व्यक्ति अस्वस्थ है तो वह ठीक से काम नहीं कर सकता। चिकित्सा सुविधाओं के अभाव में एक अस्वस्थ मजदूर अपनी उत्पादकता और अपने देश की उत्पादकता को कम करता है। इसलिए किसी व्यक्ति के कामयाब जीवन में स्वास्थ्य महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता

Question 6 :
प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रों में किस तरह की विभिन्न आर्थिक क्रियाएँ संचालित की जाती

Answer 6 :

प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक क्षेत्र में पृथक्-पृथक संचालित की जाने वाली प्रमुख क्रियाएँ इस प्रकार हैं|

  1.  प्राथमिक क्षेत्र–कृषि, वन एवं मत्स्य पालन, खनन तथा उत्खनन ।
  2. द्वितीयक क्षेत्र—उत्पादन, विद्युत-गैस एवं जल की आपूर्ति, निर्माण, व्यापार, होटल तथा जलपानगृह
  3.  तृतीयक क्षेत्र- परिवहन, भण्डार, संचार, वित्तीय, बीमा, वास्तविक संपत्ति तथा व्यावसायिक सेवाएँ, सामाजिक एवं व्यक्तिगत् सेवाएँ।।

Question 7 :
आर्थिक और गैर आर्थिक क्रियाओं में क्या अन्तर है?

Answer 7 :

आर्थिक क्रियाएँ-वह क्रियाएँ जो जीविका कमाने के लिए और आर्थिक उद्देश्य से की जाती हैं, आर्थिक क्रियाएँ कहलाती हैं। यह क्रियाएँ उत्पादन, विनियम एवं वस्तुओं और सेवाओं के वितरण से संबंधित होती हैं। लोगों का व्यवसाय, पेशे और रोज़गार में होना आर्थिक क्रियाएँ हैं। इन क्रियाओं का मूल्यांकन मुद्रा में किया जाता है।
गैर-आर्थिक क्रियाएँ-वह क्रियाएँ जो भावनात्मक एवं मनोवैज्ञानिक आवश्यकताओं की संतुष्टि के लिए की जाती हैं। और जिनका कोई आर्थिक उद्देश्य नहीं होता, गैर-आर्थिक क्रियाएँ कहलाती हैं। यह क्रियाएँ सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक, शैक्षिक एवं सार्वजनिक हित से संबंधित हो सकती हैं।

Question 8 :
महिलाएँ क्यों निम्न वेतन वाले कार्यों में नियोजित होती हैं?

Answer 8 :

महिलाएँ निम्न कारणों से निम्न वेतन वाले कार्यों में नियोजित होती हैं

  1.  ज्ञान व जानकारी के अभाव में महिलाएं असंगठित क्षेत्रों में कार्य करती हैं जो उन्हें कम मजदूरी देते हैं। उन्हें अपने
  2. कानूनी अधिकारों की जानकारी भी नहीं है।
  3.  महिलाओं को शारीरिक रूप से कमजोर माना जाता है इसलिए उन्हें प्रायः कम वेतन दिया जाता है।
  4. बाजार में किसी व्यक्ति की आय निर्धारण में शिक्षा महत्त्वपूर्ण कारकों में से एक है।
  5. भारत में महिलाएँ पुरुषों की अपेक्षा कम शिक्षित होती हैं। उनके पास बहुत कम शिक्षा एवं निम्न कौशल स्तर हैं। इसलिए उन्हें पुरुषों की तुलना में कम वेतन दिया जाता है।
  6.  महिलाएँ भौतिक एवं भावनात्मक रूप से कमजोर होती हैं।
  7. महिलाएँ खतरनाक कार्यों (hazardous work) के लिए उपयुक्त नहीं होती हैं।
  8.  महिलाओं के कार्यों पर सामाजिक प्रतिबंध होता है।
  9. महिलाएँ दूर स्थित, पहाड़ी एवं मरुस्थलीय क्षेत्रों में कार्य नहीं कर सकती।

Question 9 :
‘बेरोजगारी’ शब्द की आप कैसे व्याख्या करेंगे?

Answer 9 :

वह स्थिति जिसके अन्तर्गत कुशल व्यक्ति प्रचलित कीमतों पर कार्य करने के इच्छुक होते हैं किन्तु कार्य नहीं प्राप्त कर पाते, तो ऐसी स्थिति बेरोजगारी कहलाती है, यह स्थिति विकसित देशों की अपेक्षा विकासशील देशों में अधिक देखने को मिलती है।

Question 10 :
प्रच्छन्न एवं मौसमी बेरोजगारी में क्या अन्तर है?

Answer 10 :

प्रच्छत्र एवं मौसमी बेरोजगारी में अंतर इस प्रकार है
प्रच्छन्न बेरोजगारी–इस बेरोजगारी में लोग नियोजित प्रतीत होते हैं जबकि वास्तव में वे उत्पादकता में कोई योगदान नहीं कर रहे होते हैं। ऐसा प्रायः किसी क्रिया से जुड़े परिवारों के सदस्यों के साथ होता है।

जिस काम में पाँच लोगों की आवश्यकता होती है किन्तु उसमें आठ लोग लगे हुए हैं, जहाँ 3 लोग अतिरिक्त हैं। यदि इन 3 लोगों को हटा लिया जाए तो भी उत्पादकता कम नहीं होगी। यही बचे 3 लोग प्रच्छन्न बेरोजगारी में शामिल हैं।
मौसमी बेरोजगारी-वर्ष के कुछ महीनों के दौरान जब लोग रोजगार नहीं खोज पाते, तो ऐसी स्थिति मौसमी बेरोजगारी कहलाती है।
भारत में कृषि कोई पूर्णकालिक रोजगार नहीं है। यह मौसमी है। इस प्रकार की बेरोजगारी कृषि में पाई जाती है। कुछ व्यस्त मौसम होते हैं जब बिजाई, कटाई, निराई और गहाई की जाती है। कुछ विशेष महीनों में कृषि पर आश्रित लोगों को अधिक काम नहीं मिल पाता।


Selected

 

Chapter 2- संसाधन के रूप में लोग Contributors

krishan

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