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Chapter 6- नगर, व्यापारी और शिल्पिजन Interview Questions Answers

Question 1 : आपके मत से लोग तंजावूर को एक महान नगर क्यों मानते थे? 

Answer 1 : तंजावूर चोल राजाओं की राजधानी थी। वर्ष में बारहों महीने बहने वाली कावेरी नदी इस सुंदर नगर के पास बहती है। इस नगर में सुंदर और भव्य कई ऐतिहासिक इमारतों का निर्माण हो चुका था। इस नगर में मंदिर के अलावा अनेक राजमहल हैं, जिनमें कई मंडप बने हुए हैं। राजा लोग इन मंडपों में अपना दरबार लगाते थे। नगरे उन बाज़ारों की हलचल से भरा हुआ था। तंजावूर एक मंदिर नगर का भी उदाहरण है। मंदिर नगर नगरीकरण का एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण प्रतिरूप प्रस्तुत करते हैं।

Question 2 : आपके विचार से इस प्रविधि के प्रयोग (लुप्तमोम तकनीक) के क्या-क्या लाभ थे? 

Answer 2 :

‘लुप्तमोम’ तकनीक के अन्तर्गत सर्वप्रथम मोम की एक प्रतिमा बनाई जाती थी। इसे चिकनी मिट्टी से पूरी तरह लीपकर सूखने के लिए छोड़ दिया जाता था। जब वह पूरी तरह सूख जाती थी, तो उसे गर्म किया जाता था और उसके मिट्टी के आवरण में एक छोटा-सा छेद बनाकर उसे छेद के रास्ते सारा पिघला हुआ मोम बाहर निकाल दिया जाता था, फिर चिकनी मिट्टी के खाली साँचे में उसी छेद के रास्ते पिघली हुई धातु । भर दी जाती थी। जब वह धात् ठंडी होकर ठोस हो जाती थी, तो चिकनी मिट्टी के आवरण को सावधानीपूर्वक हटा दिया जाता था।
इस विधि से किसी भी प्रतिमा को सस्ता और सुंदर बनाया जाता था तथा इस प्रतिमा में काफ़ी चमक भी होती थी। प्रतिमा मिट्टी और मोम से बने होने के बावजूद भी काफ़ी मजबूत होती थी।

Question 3 : आज बाज़ार पर लगने वाले करों के बारे में कुछ और जानकारी प्राप्त करें। इन्हें कौन इकट्ठा करता है, वे किस प्रकार वसूल किए जाते हैं और उनका प्रयोग किस काम के लिए होता है? 

Answer 3 : बाज़ार में लगने वाले कर बिक्री हैं, इन्हें सरकार के आयकर विभाग के अधिकारी और कर्मचारी वसूल करते हैं। ये कर विक्रेताओं से वसूल किए जाते हैं। इन करों का प्रयोग प्रशासनिक कार्यों, विकास कार्यों और लोक कल्याणकारी कार्य के लिए किया जाता है।

Question 4 : आपके विचार से हम्पी नगर किलेबंद क्यों था? 

Answer 4 : हम्पी नगर विजयनगर साम्राज्य की राजधानी थी। विजयनगर साम्राज्य की राजधानी होने के कारण सुरक्षा की दृष्टि से इस नगर को किलेबंद किया गया था, जिससे कि यह नगर बाहरी आक्रमण से सुरक्षित रह सके।

Question 5 : अंग्रेज़ों और हॉलैंडवासियों ने मसूलीपट्टनम में अपनी बस्तियाँ बसाने का निर्णय क्यों लिया? 

Answer 5 : मसूलीपट्टनम समुद्र के किनारे बसा हुआ है। पहले यहाँ पर मछुआरे रहते थे, लेकिन धीरे-धीरे व्यापारी लोग भी यहाँ रहने लगे। व्यापारी लोगों का दूसरे देशों से व्यापार होता रहता था। यहाँ पर इंग्लैण्ड तथा हॉलैंड के निवासी आते-जाते रहते थे और वे यहाँ पर रुकते भी थे। इस स्थान पर जहाजों के लिए लंगर डालने की | व्यवस्था हो गयी थी। व्यापारिक सुविधाओं के कारण ही अंग्रेज़ों और हॉलैंडवासियों ने मसूलीपट्टनम में अपनी बस्तियाँ बसाने का निर्णय लिया।

Question 6 :
रिक्त स्थानों की पूर्ति करें :
(क) राजराजेश्वर मंदिर …………………. में बनाया गया था।
(ख) अजमेर सूफ़ी संत ……………… से संबंधित है।
(ग) हम्पी ……………….. साम्राज्य की राजधानी थी।
(घ) हॉलैंडवासियों ने आंध्र प्रदेश में ………………………….. पर अपनी बस्ती बसाई।

Answer 6 :

(क) ग्यारहवीं सदी में
(ख) ख्वाजा मुइनुउद्दीन चिश्ती
(ग) विजयनगर
(घ) मसूलीपट्टनम।

Question 7 :
बताएँ क्या सही है और क्या गलत :
(क) हम राजराजेश्वर मंदिर के मूर्तिकार (स्थपति) का नाम एक शिलालेख से जानते हैं।
(ख) सौदागर लोग काफ़िलों में यात्रा करने की बजाय अकेले यात्रा करना अधिक पसंद करते थे।
(ग) काबुल हाथियों के व्यापार का मुख्य केंद्र था।
(घ) सूरत बंगाल की खाड़ी पर स्थित एक महत्त्वपूर्ण व्यापारिक पत्तन था।

Answer 7 :

(क) सही
(ख) गलत
(ग) गलत
(घ) गलत।

Question 8 : तंजावूर नगर को जल की आपूर्ति कैसे की जाती थी?

Answer 8 : तंजावूर नगर को जल की आपूर्ति कुँओं और तालाबों द्वारा की जाती थी।

Question 9 : मद्रास जैसे बड़े नगरों में स्थित ‘ब्लैक टाउन्स’ में कौन रहता था?

Answer 9 : ब्लैक टाउन्स में भारतीय व्यापारी, शिल्पकार, औद्योगिक मजदूर एवं अन्य क्षेत्रों में काम करने वाले मजदूर तथा कर्मचारी रहा करते थे।

Question 10 : आपके विचार से मंदिरों के आस-पास नगर क्यों विकसित हए?

Answer 10 :

मंदिरों के आस-पास नगरों के विकसित होने के कारण
1. मंदिर के कर्ता-धर्ता मंदिर के धन को व्यापार एवं साहूकारी में लगाते थे। 
2. शनैः शनैः समय के साथ बड़ी संख्या में पुरोहित-पुजारी, कामगार, शिल्पी, व्यापारी आदि मंदिर तथा उसके | दर्शनार्थियों एवं तीर्थयात्रियों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए मंदिर के आस-पास बसते गए। 
3. मंदिर के दर्शनार्थी भी दान दक्षिण दिया करते थे तथा राजा द्वारा भी भूमि एवं धन अनुदान में दिए जाते थे, इससे मंदिर के पुजारियों की आजीविका चलती थी। 
4. तीर्थयात्रियों तथा पुरोहित पंडितों को मंदिर प्रशासन द्वारा भोजन कराया जाता था, जिससे मंदिर के पास साधु-संत और पुरोहित-पंडितों को आवास स्थान बन गया था। 


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Chapter 6- नगर, व्यापारी और शिल्पिजन Contributors

krishan

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