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Chapter 5- न्यायपालिका Interview Questions Answers

Question 1 : क्या आपको ऐसा लगता है कि इस तरह की न्यायिक व्यवस्था में एक आम नागरिक भी किसी नेता के खिलाफ मुकदमा जीत सकता है? अगर नहीं तो क्यों? 

Answer 1 : इस तरह की न्यायिक व्यवस्था जहाँ किसी न्यायाधीश को उसके पद से हटा सकते हैं या उसका तबादला कर सकते हैं, वहाँ एक आम आदमी किसी नेता के खिलाफ मुकदमा नहीं जीत सकता है, क्योंकि इस स्थिति में न्यायाधीश स्वतंत्र रूप से फैसले नहीं ले सकते हैं, और वह हमेशा नेता के पक्ष में ही फैसला सुनाएगा।

Question 2 : दो वजह बताइए कि लोकतंत्र के लिए स्वतंत्र न्यायपालिका अनिवार्य क्यों होती है? 

Answer 2 :

लोकतंत्र के लिए स्वतंत्र न्यायपालिका अनिवार्य
1. न्यायपालिका की स्वतंत्रता अदालतों को भारी ताकत देती है, क्योंकि स्वतंत्र न्यायपालिका ही | विधायिका और कार्यपालिका द्वारा शक्तियों के दुरुपयोग को रोक सकती है। 2. स्वतंत्र न्यायपालिका ही नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा कर सकती है। यदि न्यायपालिका स्वतंत्र नहीं होगी तो नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन होगा। 

Question 3 : उपरोक्त मामले को पढ़ने के बाद दो वाक्यों में लिखिए कि अपील की व्यवस्था के बारे में आप क्या जानते हैं। 

Answer 3 : अपील व्यवस्था से मतलब है कि अगर किसी व्यक्ति को लगता है कि निचली अदालत का फैसला सही नहीं है तो वह उससे ऊपर की अदालत में उस फैसले के विरुद्ध अपील कर सकता है।

Question 4 :

Answer 4 :

उदाहरण
1. सरदार सरोवर बाँध को लेकर केंद्र और राज्य (गुजरात) सरकार के बीच विवाद। 
2. दो राज्यों पंजाब और हरियाणा राज्य में पानी को लेकर विवाद। 
3. पड़ोसी की भूमि पर जबरदस्ती कब्जा करना। 
4. अस्पताल द्वारा घायल व्यक्ति को भर्ती करने से इनकार करना। 

Question 5 : फौजदारी और दीवानी कानून के बारे में आप जो समझते हैं उसके आधार पर इस तालिका को भरें

Answer 5 :


Question 6 : आप पढ़ चुके हैं कि कानून को कायम रखना और मौलिक अधिकारों को लागू करना’ न्याय पालिका का एक मुख्य काम होता है। आपकी राय में इस महत्त्वपूर्ण काम को करने के लिए न्यायपालिका का स्वतंत्र होना क्यों जरूरी है?

Answer 6 :

स्वतंत्र न्यायपालिका-
1. न्यायपालिका की स्वतंत्रता अदालतों को भारी ताकत देती है इसके आधार पर वह विधायिका और कार्यपालिका द्वारा शक्तियों के दुरुपयोग को रोक सकती है। 
2. न्यायपालिका देश के नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा में अहम भूमिका निभाती है। 
3. अगर किसी नागरिक को लगता है कि उसके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है तो वह अदालत में जा सकता है। 

Question 7 : अध्याय 1 में मौलिक अधिकारों की सूची दी गई है। उसे फिर पढ़े। आपको ऐसा क्यों लगता है कि संवैधानिक उपचार का अधिकार न्यायिक समीक्षा के विचार से जुड़ा हुआ है?

Answer 7 :

संवैधानिक उपचार का अधिकार-
यदि किसी नागरिक को लगता है कि राज्य द्वारा उसके किसी मौलिक अधिकार का उल्लंघन हुआ है तो मौलिक अधिकार की प्राप्ति के लिए इस अधिकार का सहारा लेकर अदालत जा सकता है।
न्यायिक समीक्षा-
यदि न्यायपालिका को लगता है कि संसद द्वारा पारित किया गया कोई कानून संविधान के अनुसार नहीं है। तो वह उस कानून को रद्द कर सकती है। इसे न्यायिक समीक्षा कहा जाता है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि संवैधानिक उपचार का अधिकार न्यायिक समीक्षा से जुड़ा है, क्योंकि संवैधानिक उपचार के अंतर्गत न्यायालय कानून को रद्द कर सकता है।

Question 8 : नीचे तीनों स्तर के न्यायालय को दर्शाया गया है। प्रत्येक के सामने लिखिए कि उसे न्यायालय ने सुधा गोयल के मामले में क्या फैसला दिया था? अपने जवाब को कक्षा के अन्य विद्यार्थियों द्वारा दिए गए जवाबों के साथ मिलाकर देखें।

Answer 8 :

सर्वोच्च न्यायालय-लक्ष्मण और उसकी माँ शकुंतला को दोषी पाया और उम्रकैद की सजा सुनायी। सुभाषचंद्र के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं थे इसलिए उसे दोष मुक्त कर दिया।
उच्च न्यायालय-सुधा की मौत एक दुर्घटना थी क्योंकि तीनों के विरुद्ध पर्याप्त सबूत नहीं। लक्ष्मण, शकुंतला और सुभाषचंद्र तीनों को बरी कर दिया।
निचली अदालत-लक्ष्मण, उसकी माँ शकुंतला और सुधा के जेठ सुभाष को दोषी करार दिया और तीनों को मौत की सजा सुनाई।

Question 9 :
सुधा गोयल मामले को ध्यान में रखते हुए नीचे दिए गए बयानों को पढ़िए। जो वक्तव्य सही हैं उन पर सही का निशान लगाइए और जो गलत हैं उनको ठीक कीजिए।
(क) आरोपी इस मामले को उच्च न्यायालय लेकर गए, क्योंकि वे निचली अदालत के फैसले से सहमत नहीं थे।
(ख) वे सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में चले गए।
(ग) अगर आरोपी सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से संतुष्ट नहीं हैं तो दोबारा निचली अदालत में जा सकते हैं।

Answer 9 :

(क) सही।
(ख) गलत।
निचली अदालत के फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में चले गए।
(ग) गलत।
सर्वोच्च न्यायालय देश की सबसे ऊपरी अदालत है इसके फैसले के खिलाफ निचली अदालत में नहीं जा सकते हैं।

Question 10 : आपको ऐसा क्यों लगता है कि 1980 के दशक में शुरू की गई जनहित याचिका की व्यवस्था सबको इंसाफ दिलाने के लिहाज से एक महत्त्वपूर्ण कदम थी?

Answer 10 :

जनहित याचिका-
1. इसके द्वारा सर्वोच्च न्यायालय ने न्याय तक ज्यादा-से-ज्यादा लोगों की पहुँच स्थापित पर करने का प्रयास किया है। 
2. न्यायालय ने किसी भी व्यक्ति या संस्था को ऐसे लोगों की ओर से जनहित याचिका दायर करने का अधिकार दिया है जिनके अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है। 
3. यह याचिका उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय में दायर की जा सकती है। 
4. अब सर्वोच्च न्यायालय या उच्च न्यायालय के नाम भेजे गए पत्र या तार (टेलीग्राम) को भी जनहित याचिका माना जा सकता है। 


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Chapter 5- न्यायपालिका Contributors

krishan

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